विघ्नों पर विजय,विवेक का जागरण और सामूहिक मंगल की कामना के प्रतीक हैं : श्री गणे,लालबागचा के राजा
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Wed, Sep 16, 2026
गणेश पक्ष की महत्ता: क्यों देशभर में प्रसिद्ध हैं ‘लालबाग के राजा’?
विघ्नहर्ता की आराधना से लेकर जनआस्था के विराट उत्सव तक
मुम्बई- गणेश पक्ष भगवान श्री गणेश की आराधना का विशेष पर्वकाल है। गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला यह उत्सव श्रद्धा, भक्ति और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक बन चुका है।
सनातन परंपरा में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और बुद्धि-विवेक के देवता के रूप में पूजा जाता है। किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में गणेश पूजन की परंपरा इसी धार्मिक मान्यता से जुड़ी है।
लालबाग के राजा की अलग पहचान-
मुंबई के लालबाग क्षेत्र में स्थापित लालबागचा राजा गणेशोत्सव की सबसे प्रसिद्ध सार्वजनिक परंपराओं में गिना जाता है। हर वर्ष गणेशोत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
लालबाग के राजा को भक्तों के बीच लोकप्रिय रूप से “नवसाला पावणारा गणपति” कहा जाता है। यह एक लोकविश्वास और श्रद्धा की अभिव्यक्ति है,भक्त यहां अपनी मनोकामनाओं के साथ आते हैं और गणपति से आशीर्वाद मांगते हैं।
आस्था से आगे सामाजिक संदेश-
लालबाग का गणेशोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़ा रहा है। सार्वजनिक गणेशोत्सव ने विभिन्न वर्गों के लोगों को एक साथ आने का अवसर दिया और मुंबई की सांस्कृतिक पहचान में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
गणेश पक्ष का संदेश-
विघ्न आएं तो विवेक से सामना करें,संकट आएं तो संकल्प न छोड़ें,और सफलता मिले तो समाज के साथ बांटें।
यही गणेश आराधना के व्यापक संदेश को समझने का एक मार्ग है।
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