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काश ! अटल- इंदिरा होते तो न होती ऐसी हालत : दुनिया का बना दरोगा अमेरिका ने कर दिया बड़ा खेला - सीजफायर

Editor

Sun, May 11, 2025

नेशनल डेस्क - हिंदुस्तान में समय समय पर अनेक शूरमाओं ने जन्म लिया और अपने किरदार निभाये,इतिहास बनाया और कुछ अमिट यादें छोड़कर चले गए। जी हां,हम बात कर रहे हैं आज उन्हें जिन्होंने बहादुरी के कुछ पटकथा को ऐसा लिखा जिसे जब जब याद करेंगे तब तब वह प्रासंगिक लगेगी।

22 अप्रैल का वह भयानक काला दिन जो भारत के लिए नासूर बन गया पहलगाम हमला.जिसे भुलाया नही जा सकता। 28 लोगों की हत्या,सिंदूर के सामने सिंदूर के रखवाले की गोली मारकर हत्या कर दी गई और हम शांत हो गए।पहलगाम हमला न एक साधारण हमला है बल्कि वर्तमान सरकार को नापने का एक अलग मीटर है,जिससे उसकी नाप ली गई,थाह ली गई और धर्म के मीटर सूत्र पर आगे की लंबाई चौड़ाई की याद दिला दी आतंकवादियों ने। 22 अप्रैल की बारदात को 7 मई की रात हम युद्ध के रूप में ले आये,पाकिस्तान के आंगन में घुसने का प्रयास किया,तांडव होने लगा,चारों तरफ हालात शूट आउट में बदलने लगे। लोग चर्चा करने लगे थे कि मोदी हैं तो मुमकिन है,चौकीदार अबकी बार पाकिस्तान जीत कर लाएगा, पीओके हमारा होगा और पाकिस्तान भी। लेकिन इन सबमें से कुछ भी सच नही हुआ। बल्कि दो मुल्कों के बीच तीसरा हीरो बनकर दुनिया का दरोगा बन गया और सीजफायर का गॉडफादर कहलाया - अमेरिका।

अब मोदी से लोग बेआबरू होने लगे हैं। 2025 का समय मोदी का है,लेकिन याद आने लगे अटल जी और इंदिरा जी।

अटल जी अपने इरादों पर अटल थे,अमेरिका के आगे नही झुके-

अटल जी इसलिए कि,कारगिल का युद्ध हो रहा था तब अमेरिका ने एक चाल चली पाकिस्तान की ओर से की युद्ध बन्द कर दें,पाकिस्तान के पास परमाणु बम भी है,नुकसान हो जाएगा। तब याद है हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री अटल जी ने क्या कहा अमेरिका के राष्ट्रपति से । उन्होंने कहा कि आज रात जो उसे छोड़ना हो छोड़ ले,परमाणु छोडकर हमारे कुछ लोगों को मार सकता होगा,लेकिन कल सुबह का सूरज पाकिस्तान नही देख सकेगा। यह था भारत का रुतबा,तब भी दरोगा बनने चला था अमेरिका लेकिन एक भी नही लगी और न चली अटल जी की बुद्धि व ताकत के सामने,वे डरपोक नहीं बल्कि बहादुर थे।

याद आने लगीं इंदिरा-

इंदिरा भी याद आने लगीं। याद आने लगा 1971 का युद्ध जब पाकिस्तान के साथ लड़ा गया। उस वक्त इंडिया की प्राइम मिनिस्टर इंदिरा गांधी जी थीं। एक महिला प्रधानमंत्री लेकिन शेरनी की तरह खूंखार थीं दुश्मनों के लिए। पाकिस्तान को बांट कर बंग्लादेश बना दिया। उस वक्त भी अमेरिका ने दोगली पंथी खेलने की कोशिश की लेकिन भारत के प्रधानमंत्री इंदिरा को इलेक्शन का नहीं बल्कि अपने सलेक्शन का भय था,की हमारे देश का क्या होगा,हमारी इज्जत का क्या होगा और आने वाले इतिहास में हमारी जगह कहाँ होगी। उन्होंने न अमेरिका की गीदड़ भभकी सुनी और न किसी अन्य की,दो टुकड़े कर दिए पाकिस्तान के,उसका भूगोल बदल दिया और इतिहास भी। तब इतना संसाधन व परमाणु बम भी नही था भारत के पास,इतने अस्त्र नही थे,इतनी टेक्नोलॉजी नही थी,उस पर भी वह लेडी आयरन की तरह मजबूत खड़ी रहीं,सेना का हौसला अफजाई की और भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में आयरन लेडी के नाम से जानी गई।

अफसोस,यह है कि 2025 में संसाधन भी है,नई तकनीकी भी और परमाणु बम भी। इस वक्त पूरा देश सरकार के साथ खड़ा दिखा। न हिन्दू न मुसलमान,न सत्ता न विपक्ष कुल मिलाकर पूरा देश एकजुट था। उम्मीद थी कि मोदी जी बड़ा करेंगे अब हर हाल में पाकिस्तान का नामोनिशान मिट जाएगा आतंकवाद के सिरहाने से,लेकिन खोदा पहाड़ निकली चुहिया वाली कहावत चरितार्थ हो गई। पीएम मोदी ने पूरे भारतवासियों की उम्मीदों को ठग कर अपने सीने का नाप घटा बैठे । आखिर क्या वजह है जो 3 दिन में ही दोनों मुल्कों के बीच अमेरिका घुस आया और सीजफायर का दरोगा बन बैठा। सीजफायर का एलान करना था तो भारत खुद करता या फिर पाकिस्तान करता ये अमेरिका कैसे हिमाकत करने लगा और आप मान भी गए।

इससे बढ़िया तो वह महिला ही मर्द थी जिसने 71 में दुश्मन देश की पतलून गीली कर उसी के घर को बांट कर चली आई। सेना पर भरोसा और खुली छूट देना तो कोई इंदिरा गांधी से सीखे। वह खुद जंग के मैदान में युद्ध के समय हौसला अफजाई करने पहुंच जाती थीं।

देश आज गुस्से में है। जबाब चाहता है कि पाकिस्तान को सबक क्यों नहीं। पहले भी कई बार समझौता किया और फिर उल्लंघन किया है पाकिस्तान ने। यह कायराना हरकत तो दुश्मन मुल्क की फितरत है। भारत अब कमजोर नही है,युद्ध कला कौशल और फौलादी आत्मबल में मजबूत है। धोखेबाज को मौका देकर ठीक नही किया गया है। अमेरिका की यदि बात नही मानते तो भारत विजयी बन जाता और पाकिस्तान एक टुकड़े में और बंट जाता। अमेरिका दुनिया का दरोगा नहीं बनता यदि भारत उसकी बात नही सुनता तो।

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