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: किसानी,जवानी और पानी ही बना सकता है भारत को विश्वगुरु- जलपुरुष

Admin

Mon, Jun 13, 2022

नेशनल डेस्क- भारतीय संस्कृति और विरासत की धुरी किसानी और पानी से जुड़ी हुई है। किसानी अर्थात भारत भूमि के किसान पानी मतलब नदियों का प्रवाह और जवानी मतलब भारत की ताकत और संकल्पित ऊर्जा,इन सबकी बढ़ोतरी और संरक्षण ही राष्ट्र की ताकत है। भारत मे नदियों को बचाकर रेगिस्तान में भी पानी की धारा प्रवाहित करने वाले मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित जलपुरुष के नाम से पहचाने जाने वाले डॉ राजेन्द्र सिंह ने उक्त विचार भारतभूमि व पर्यावरण संरक्षण के लिए दिए।

खेती की शुभता से भारत दुनिया को सिखाने लायक बनेगा - 

भारत को किसानों का देश कहते थे,तब गुलाम भारत मे भी भारत का किसान स्वावलंबी और आजाद था। अब आजाद भारत मे किसान उद्योगपतियों का गुलाम बन रहा। वर्तमान में खेती का व्यापार बहुत भयानक है। यह खेती को डुबाने वाली प्रक्रिया है। इससे भारत मे खेती में लगे हुए लोग कर्ज में दब जाएंगे,इससे हमें बचना होगा और मूल प्राकृतिक खेती को खर्च कम करके करनी होगी। यह खेती शुभ के लिए होती है।इसलिये जब हम खेती की विद्या को अपनाएंगे तो भारत दुनिया को सिखाने के लायक बन जायेगा। किसान के अद्भुत ज्ञान ने ही भारत को गुरु व सोने की चिड़िया बनाया था।

गाँव,किसानी,जवानी और पानी को अवसर दें -   भारत यदि अपने को फिर से गुरु बनने के सपने देखता है ,तो एक ही रास्ता है कि हम भारत के गांवों,किसानो,जवानों व पानी को गांव में अच्छे उत्पादन के अवसर दें। गाँव की मिट्टी और गाँव के पानी को किसान ही समझता है। वही उसके साथ अच्छे रिश्ते बनाकर रख सकता है। कम्पनी भारत भूमि के साथ वो रिश्ते नही बना सकती ,वे भारत भूमि को केवल लाभ के लिए केवल शोषण करते हैं। शोषण से कभी राष्ट्र का भला नही होता है। जब तक खेती बाजारू बनी रहेगी तब तक किसान लूूटाता रहेगा।    
प्रदूषण व कृषि के व्यवसायीकरण को देखते हुए उन्होंने कहा कि भारत मे खेती को विरासत मानकर कैसे हम अपने जीवन को अच्छा बनाकर रख सकते हैं और कैसे लूट से बच सकते हैं। खेती भारत की विरासत व संस्कृति है।खेती उद्योग या व्यापार नही है। भारत ने जब तक खेती को संस्कृति माना तब तक भारत दुनिया को सिखाने लायक बना रहा था,तब भारत अपनी खेती को विद्या से चलाता था,तब शिक्षा नही थी।
राष्ट्र पोषण का काम भारत के किसान ही कर सकते हैं- 
आज किसानी को बाजार अधीन बनने से रोकने की सबसे पहली जरूरत है। बाजार का आधार केवल लाभ व शोषण होता है। भारत मे "उत्तम खेती मध्यम वान, निषिद्ध चाकरी भीख निदान " था। खेती ही भारत की संस्कृति थी ,जो शुभ के लिए होती थी। आज भारत को समृद्ध बनाने के लिए किसानों के प्राकृतिक संरक्षण के काम को सम्मान देने की जरूरत है,स्वावलंबी गाँव बनेंगे ,यही आत्मनिर्भर भारत बनाने का एक मात्र रास्ता है। 
 

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