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शक्ति आराधना का अनूठा दृश्य ;- माता दुर्गा को तलवारें भेंट : शंकराचार्य ने किया शस्त्रों से अर्चन

Editor

Mon, Aug 24, 2026

शक्ति आराधना का अनूठा दृश्य: माता दुर्गा को तलवारें भेंट, शंकराचार्य ने किया शस्त्रों से अर्चन”

सलधा/बेमेतरा(छत्तीसगढ़)- माता दुर्गा को तलवारें भेंट कर शंकराचार्य जी ने किया शक्ति आराधना। 108 तलवारों से देवी का अर्चन कर धर्म व गो माता की रक्षा का संकल्प लिया गया। यह अवसर था श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का। इस अवसर पर शक्ति की अधिष्ठात्री माता दुर्गा को तलवारें चढ़ा कर शास्त्र व शस्त्र के युगल शक्ति का आह्वान किया,यह संकल्प धर्म रक्षा के लिए लिया गया है।

बता दें कि,ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज इस वक्त अपना चातुर्मास्य व्रत संकल्प छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिला अंतर्गत सलधा गाँव में निर्माणाधीन सपाद लक्षेश्वर धाम में पूर्ण कर रहे हैं।

माता दुर्गा को अर्पित तलवारें बनीं धर्म,गौ और संस्कृति की रक्षा के संकल्प का प्रतीक -

शंकराचार्य द्वारा दुर्गा माँ को अर्पित की गईं तलवारें हिंसा के लिए नहीं,बल्कि सनातन धर्म,गौ,और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए होंगी। यह प्रतीक के रूप में चतुरंगिणी सेना के हाथों में हो सकती हैं जिसका उद्देश्य किसी हिंसा को बढ़ावा देना नही होगा बल्कि यह धर्म रक्षा व गो रक्षार्थ धर्मयुद्ध की गर्जना के लिए होगा।

चतुरंगिणी सेना का गठन भी शंकराचार्य ने किया है,जिसका उद्देध्य है मठ,मन्दिर,गौ और धर्म की रक्षा। शास्त्र से ज्ञान और जनजागरण का कार्य होता है तो वहीं शस्त्र का प्रयोग आत्म रक्षा व धर्म के प्रतीकों की रक्षा का है। यह तलवारें पंजाब से आई है, शौर्य और आत्मबल की प्रतीक इन तलवारों का वितरण भी श्री शंकराचार्य सैन्य बल यानि चतुरंगिणी सेना के सेनापतियों को होना है।

राज्य भर के 403 विधानसभाओं में गौ रक्षा जनजागरण का हो चुका है शंखनाद-

मई से जुलाई तक कुल 81 दिनों की यात्रा कर चुके शंकराचार्य ने यूपी के 403 विधान सभाओं में गो रक्षा गो प्रतिष्ठा जन जागरण का शंखनाद किया है। जिससे तेजी गो प्रतिष्ठा का माहौल बना है। गो माता को प्रदेश स्तर में राज्य माता की प्रतिष्ठा प्रदान की जाय और केंद्रीय स्तर पर राष्ट्र माता का दर्जा मिले यही मांग है शंकराचार्य जी की। सरकारों को कोई दुविधा न हो इसलिए जन जागरण और लोक तांत्रिक रवैया भी अख्तियार किया गया है। गो मतदाता बनाकर चुनाव में गो माता के नाम पर वोट करने की भी अपील की गई है। इस अपील से निश्चित रूप से राजनीतिक गलियारों में उथल पुथल मची हुई है। सत्ता व विपक्ष दोनों गौ माता प्रतिष्ठा आंदोलन को भुनाने में मौका तलाश रहे हैं।

हालांकि, शंकराचार्य जी का किसी राजनीतिक दल से कोई लेना देना नही है बल्कि वह गौ माता की प्रतिष्ठा को लोक तांत्रिक रूप से दर्जा दिलाने का मजबूत आधार बना रहे हैं जिससे गौ माता को उनके सम्मान का संवैधानिक अधिकार प्राप्त हो सके।

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