: शाला प्रवेशोत्सव पर सीएम ने दंडकारण्य को दी शिक्षा की सौगात
Thu, Jun 16, 2022
रायपुर
- गर्मी की छुट्टी के बाद अब स्कूल खुल गए हैं। आज से इसकी शुरुवात हुई। शासकीय विद्यालयों में शाला प्रवेश उत्सव के माध्यम से बच्चों का प्रवेश कराया गया। इस सत्र में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। दण्डकारण्य के बस्तर संभाग के लगभग चार जिलों में वर्षों से बन्द पड़े स्कूलों को दोबारा खोल कर सुदूर नक्सली क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा की नई सौगात दी है। मुख्यमंत्री ने इसकी वर्चुअल शुरुवात वीडियो कांफ्रेंस के जरिये की। मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से दोपहर लगभग 1.30 बजे वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के स्कूलों में शाला प्रवेश उत्सव का शुभारंभ किया गया।
260 स्कूलों में 11 हजार बच्चे होंगे लाभान्वित- चार जिलों
के लगभग 260 स्कूलों का बन्द ताला खोलकर 11 हजार बच्चों को शिक्षा का लाभ पहुंचाने की इस बड़ी पहल को शिक्षा जगत में एक नई कीर्तिमान की स्थापना माना जा रहा है। राज्य में ही नही बल्कि देश भर मे शिक्षा के क्षेत्र में यह बड़ा कदम है ।
260 स्कूलों की लिस्ट में बीजापुर जिले की 158,सुकमा के 97,नारायणपुर के 4,और दन्तेवाड़ा का 1 स्कूल शामिल है। इन सभी स्कूलों को मिलाकर 11 हजार बच्चे लाभान्वित होंगे।
इसकी जानकारी सीएम ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पालकों को दी जिससे सुदूर वनांचल के पालकों के चेहरे खुशी से चमक उठे क्योंकि अब उनके बच्चे शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। इस नई पहल का स्वागत करते हुए बच्चों व पालकों ने मुख्यमंत्री को दिल से धन्यवाद दिया। छत्तीसगढ़ महतारी एवं आत्मानंद के चित्र पर मालार्पण कर कार्यक्रम की शुरुवात करते हुए सीएम ने कुछ बच्चों से बात भी की। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने बताया कि स्कूल खोलने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किया जा चुका है। हालांकि कोरोना के मद्देनजर सुरक्षा व सावधानी रखनी जरूरी है।
: नेशनल हेराल्ड ;ईडी बनाम कांग्रेसी सत्याग्रह
Wed, Jun 15, 2022
राज्य ब्यूरो (छत्तीसगढ़)- सन 1938 नेशनल हेराल्ड की शुरुवात माना जाता है। जवाहर लाल नेहरू ने इसकी शुरुवात की । दरअसल , नेशनल हेराल्ड एक अखबार के रूप में शुरू हुआ जिसमें नेहरू के अलावा करीब 5 हजार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी इसमे शेयर होल्डर बनाये गए थे ऐसी चर्चा तथाकथित तौर पर की जाती रही है। यही अब कांग्रेस के गले की फांस बन गया है। एक तरफ 2014 से लेकर अब तक भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने राजनैतिक डिबेट,मंच से लेकर कोर्ट तक कांग्रेस के वारिश राहुल गांधी को निशाने पर लिए फिरते हैं। हालांकि राहुल गांधी के पीछे भाजपा हाथ धोकर पड़ी है।
कांग्रेस शासित प्रदेशों के नेता व मुख्यमंत्री दिल्ली में जाकर सत्याग्रह की राह पकड़े थे,लेकिन पुलिस ने जबरिया घसीटते हुए पुलिस कस्टडी में ले लिया। ये सभी कांग्रेसी अपने नेता राहुल गांधी से हो रही ईडी पूंछतांछ का विरोध प्रदर्शन करने राजधानी दिल्ली की सड़कों पर बैठे थे।
अब हम बात करते हैं राजनीतिक मतभेदों की तो बता दें कि, भाषण चाहे खुले मैदान में हो या संसद में,भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और प्रधानमन्त्री मोदी के निशाने पर कांग्रेस हमेशा रहती है। परदादा जवाहरलाल नेहरू से शुरुवात होती है और नाती राहुल गांधी तक को लपेटा जाता है। जाहिर सी बात है कि,भाजपा अपने नारे "कांग्रेस मुक्त भारत" को पूरा करने के लिए कोई कोर कसर नही छोड़ रही है। इसका जिक्र अक्सर भाजपा के मंचीय भाषणों पर होता रहता है। यही कारण है कि अब कभी राजनीतिक तौर तरीकों से तो कभी जांच एजेंसियों के माध्यम से कांग्रेस के बड़े नेताओं की पुरानी किताबें खोल ही दी जाती हैं।
नई बोतल में पुरानी शराब का सहारा-
इस बार भी कहानी कुछ ऐसी ही है। नेशनल हेराल्ड मामले को फिर से जिंदा कर दिया गया और काग्रेेेस के राहुुल
गांधी को समन भेज ईडी बुला लिया गया। हालाकिं यह मामला राहुल के समय का नही है लेकिन दादा के समय की शुरुवात पोते पे सवार वाला मामला है। यह उसी तरह है जैसे किसी नई बोतल में पुरानी शराब भर दी जाय। दरअसल जब से मोदी सरकार केंद्र में आई है तब से अन्य पार्टी के नेताओं कि नींद तो उड़ी हुई है क्योंकि ईडी और सीबीआई का पावर सबको पता है और उस करंट का बटन भी किसके हाथ है यह भी पता है। इसलिए दो राज्यों के मुख्यमंत्री भी राहुल जी के चहेतों में से हैं। खासकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तो कद्दावर व साहसिक कांग्रेसी माने जाते हैं जो राहुल के करीबी भी हैं। राहुल के कृपा पात्र बघेल ने दिल्ली जाकर और पुलिस के हाथों गिरफ्तारी देकर यह सिद्ध भी कर दिया कि उनके नेता के प्रति मन मे कितना आदर भाव है। राहुल के लिए भूपेश कुछ भी कर सकते हैं ऐसा उन्होंने कहीं कहीं अपने उद्गार व्यक्त करते रहते हैं। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक पुरोधा स्व मोतिलाल वोरा का भी नाम शामिल होने से मनी लांड्रिंग का केस अटका पड़ा है। राष्ट्रीय कांग्रेस के तत्कालीन विश्वस्त सलाहकार व धनकुबेर रहे मोतीलाल वोरा जी का इस्तेमाल हमेशा से ही कांग्रेस करती रही है। कांग्रेस के संकटमोचक रहे छत्तीसगढ़ के "बाबू "जी के नाम का हमे लगता है कहीं अब भी सहारा न ले कांग्रेस।
समर शेष है पर विशेष है..
राजनीति
में
जितने भी रंग दिखते हैं वे सभी चुनावी रंग में रंगे होते हैं। परिणामस्वरूप आज की फसल कल काटी जाएगी। यदि अपराध सिद्ध होता है तब भाजपा चारों तरफ चिल्ला चिल्ला के चोरी का सरदार सिद्ध करने में बाज नही आएगी जिसका कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है। चूंकि 2023 में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं और 2024 में लोकसभा भी। अन्य कोई दल भाजपा के सामने राष्ट्रीय स्तर पर हैं नही,सिर्फ कांग्रेस ही एक पार्टी रह गई है जो गला फाफ फाड़कर मोदी का विरोध करती है,हालांकि विपक्ष का काम ही है सत्ता पक्ष का विरोध करना। यदि विपक्ष नही होगा तो लोकतंत्र कैसे बचेगा । इसलिए राजनीतिक गोटियां सरकती रहनी चाहिए। इस तरह का माइंड प्रेशर का काम राजनीतिक तंबू को उखाड़ने में किया जाना स्वाभाविक है। हालांकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस अभी कमजोर नही हुई है ,बल्कि पहली बार मुख्यमंत्री बने भूपेश बघेल का कद व भरोसा छत्तीसगढ़ की जनता अब अधिक करने लग गई है। अन्यत्र इसका असर पड़ सकना लाजमी है। राहुल के बाद सोनिया से भी पूंछतांछ ईडी करेगी तो क्या कांग्रेसी बड़े पैमाने में धरना प्रदर्शन करेंगे या फिर कानून व्यवस्था का नैतिकता से पालन होगा यह देखने वाली बात होगी। कुछ भी हो राजनीतिक बिसात का मंच गरम है जो चरम पर हो सकता है। अभी तो शुरुवात है कुछ महीने चुनाव के बचे हैं ,घोषणा होनी शेष है । और कांग्रेस मुख्य नेत्री सोनिया गांधी का बयान भी शेष है। समर शेष है पर विशेष है । इसमे दो सवाल और उठते हैं कि यदि ईडी की कार्यवाही गलत है तो फिर राहुल गांधी को ईडी आफिस न जाकर खुद सड़क पर बैठ जाना चाहिए ,दूसरी बात यह कि फिर जो जांच चल रही है पूंछतांछ हो रही है उसका पूरे मन से सहयोग करना चाहिए। राहुल को चाहिये कि ,गलत नही हैं तो पूरे मनोयोग से कानून का पालन होने दें ताकि उनकी निष्पक्षता जनता से सामने सकारात्मक रह सके।
: आषाढ़ का पहला दिन घिर आये बदरा ,बूंदा बांदी शुरू!
Wed, Jun 15, 2022
संवाददाता (रायपुर)-
बारिश का सबको रहता है इंतजार क्योंकि वर्षा का जल ही सृजन का मूल है। आषाढ़ का पहला दिन है और बादल घिर आये, आसमान में लपक गरज भी दिखाई सुनाई पड़ने लगी। आसमान में बादल देखकर किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। ज्येष्ट पूर्णिमा के बाद का पहला दिन आषाढ़ परवा कहलाता है। आज मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में बारिश हो रही है। छत्तीसगढ़ में भी बारिश शुरू हो गई। धमतरी,रायपुर, दुर्ग भिलाई,कवर्धा में बारिश हो रही है। काफी गर्मी रही अब कुछ निजात मिलेगी।