: बस्तियों की बेहतर व्यवस्था के लिए महापौर-आयुक्त ने दिया निर्देश
Sat, Jun 25, 2022
दुर्ग
- क्षेत्र में बस्तियों की व्यवस्था को बेहतर बनाने शनिवार को बैठक लेकर महापौर ने निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों को अलर्ट मोड में रहने निर्देेेशित किया
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शनिवार को डाटा सेंटर के सभागार में आगामी मानसून में संभावित प्राकृतिक आपदा से बचाव एवं राहत व्यवस्था के संबंध मे महापौर धीरज बाकलीवाल एवं प्रभारी आयुक्त आशीष देवांगन ने लोक कर्म प्रभारी अब्दुल गनी,जलकार्य प्रभारी संजय कोहले की मौजूदगी में अधिकारी व कर्मचारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी है।
नियंत्रण कक्ष बना,बनाये गए नोडल अधिकारी -
मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदा को ध्यान में रखते हुए दुर्ग निगम कार्यालय में बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। नियंत्रण कक्ष का दूरभाष क्रमांक 0788 2322148 है। यह नियंत्रण कक्ष 24 घंटे कार्य करेगा। उपरोक्त सम्पूर्ण कार्यो की मॉनिटरिंग,व्यवस्था एवं कार्यो के संपादन हेतु सहायक अभियंता एस. डी. शर्मा दूरभाष 9826128506 नोडल अधिकारी बनाये गए है।
24 घण्टे फोन चालू रखने कर्मचारियों को आयुक्त का निर्देश-
महापौर धीरज बाकलीवाल एवं प्रभारी आयुक्त आशीष देवांगन ने निर्देश दिये हैं, कि शहर के पहुंच विहीन क्षेत्रों में जहां बाढ़ की स्थिति में पहुंचना संभव नहीं होगा, वहां पर्याप्त मात्रा में खाद्य, जीवन रक्षक दवाईयॉं आदि नियमानुसार संग्रहित करेंगे। उन्होंने कहा कि पेयजल की शुद्धता एवं स्वच्छता को दृष्टिगत रखते हुए हैण्डपम्प आदि में ब्लीचिंग पाउडर आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जावे, ताकि शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो। ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर ली जावे जहां प्रतिवर्ष बाढ़ की संभावना रहती है। जल भराव वाले क्षेत्रों के नालियों की सफाई पर जोर डाले निरन्तर गैंग लगावकर स्लम व शहर क्षेत्र में ऐसे इलाके जहां हर साल जल भराव की स्थिति निर्मित होती है वहां के नाले व नालियों की सफाई कराने व बारिश के पानी को नदी में छोड़ने योजना बनाने कहा गया। महापौर ने कहा कि अधिकारी-कर्मचारी लगातार पार्षदों से संपर्क बनाए रखेंगे,अपना फोन 24 घण्टे चालू रखेंगे फोन स्विचऑफ नहीं रखेंगे।उन्होंने ये भी कहा कि सकरी नाला,नालो के तटीय क्षेत्रों में सतत निगरानी रखी जावे, ताकि आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर शीघ्रता से पहुंचाने व ठहराने एवं खाने पीने की व्यवस्था की जा सके। प्रभारी आयुक्त देवांगन ने कहा अस्थाई कैम्प हेतु सुरक्षित शासकीय एवं अशासकीय भवनों, धर्मशालाओं, स्कूलों आदि को चिन्हित कर लिया जायें।बाढ़ से बचाव संबंधी जो उपकरण जिले में उपलब्ध है यथा तैराक, मोटर बोट, लाइफ जैकेट, मेगाफोन, तारपोलीन, दस्ताने, ड्रम, बोल्ट कटर, रस्सी, सर्च लाईट, ट्रक के ट्यूब्स आदि की दुरूस्ती कराकर उपयोग हेतु तैयार रखें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर त्वरित उपयोग में लाया जा सके। प्रभारी आयुक्त देवांगन ने कहा विद्युत व्यवस्था बनाए रखें निरन्तर मॉनिटरिंग करते रहें देखें कही दुघर्टना की संभवना न हो क्षेत्र के सभी विद्युत पोल को चेक करते रहें।
स्लम बस्तियों में विशेषरूप से करें मॉनिटरिंग-
महापौर ने कहा स्लम क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति निर्मित न हो इस हेतु यह सुनिश्चित किया जायें, कि शहर के सभी नाले व नालियों की सफाई सतत् होती रहे। नालो एवं नालियों से जलाशयों से नियमित रूप से जल निकासी आसानी से हो सके, ताकि बाढ़ की स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके।इस मौके पर उपायुक्त मोनेन्द्र साहू ,कार्यपालन अभियंता राजेश पांडेय,सहायक अभियंता आर के जैन,नोडल अधिकारी एस.डी. शर्मा, भवन अधिकारी प्रकाश चंद थावनी, सहायक अभियंता आरके पालिया,स्वास्थ्य अधिकारी गिरीश दिवान,भीम राव,स्वेता महलवार,आसमा डहरिया,पंकज साहू,विकास दमाहे,करण साहू,अनिल सिंह,शुभम गोइर समेत अन्य मौजूद थे।
: जिला-नगर प्रशासन का उरला में चला बुलडोजर,अवैध निर्माण को किया दमीदोज
Sat, Jun 25, 2022
दुर्ग
- शहर में हो रहे अवैध निर्माणों को लेकर शहर व जिला प्रशासन सख्त कदम उठा रहा है। जिसकी एक झलक शनिवार को उरला में देखने को मिली। जिला प्रशासन निगम प्रशासन एवं टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारियों के द्वारा
उरला में नेशनल हाईवे के पास खसरा नंबर 782 और 783
में लगभग 3 एकड़ भूमि पर सुनील कुमार गुप्ता एवं हिमांशु अग्रवाल द्वारा बिना ले आऊट पास कराएं अवैध प्लाटिंग किया जा रहा था जिसे संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध प्लाटिंग के रोड रास्ता नालियों एवं बाउंड्री वाल को नगर निगम की जेसीबी के द्वारा नेस्तनाबूत कर दिया गया. जिला प्रशासन द्वारा गठित टीम अवैध प्लाटिंग के मामले में पूरी तरह से सजग होकर कार्रवाई कर रही है.आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी
कार्रवाई के दौरान अनुविभागीय अधिकारी मुकेश रावटे, नगर निगम के प्रभारी आयुक्त आशीष देवांगन तहसीलदार दुर्ग प्रकाश सोनी, उपायुक्त मोहे॓॑द्र साहू भवन अधिकारी प्रकाश थवानी, सहायक भवन अधिकारी गिरीश दीवान, नगर एवं ग्राम निवेश के वरिष्ठ मानचित्रकार राजेश डूमरे, राजस्व निरीक्षक श्रीमती सुनीति निषाद, भवन निरीक्षक विनोद मांझी, उरला पटवारी चंद्रशेखर साहू, अतिक्रमण प्रभारी शिव शर्मा, एवं अतिक्रमण दल के सभी कर्मचारी उपस्थित रहे।
: छत्तीसगढ़ में बिन खेवैया,कैसे होगी पार नैया !
Sat, Jun 25, 2022
रायपुर- बिन खेवइया कैसे पार लगेगी नैया !
जी हां, छत्तीसगढ़ में 15 साल भारतीय जनता की पार्टी की सरकार रहने के वावजूद भी पिछले विधानसभा में महज 15 सीट पाकर सिमट जाना देश की नम्बर 1 सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के लिए शर्मनाक स्थिति निर्मित हुई थी। रमन सरकार के लगातार तीन पारी खेलने के बाद भाजपा की यह दुर्गति शीर्ष नेताओं के गले नही उतर रही है। एक ओर जहां विश्व के लोकप्रिय दमदार नेता की केंद्र में सरकार हो और उसी पार्टी के 15 वर्षीय सत्ताधारी नेताओं को जनता आउट कर दे यह बात हजम नही होती । भारतीय जनता पार्टी की स्वच्छ छवि व हिंदुत्वादी प्रखर राजनेता जो देश के प्रधानमंत्री भी हैं उनकी छवि पर छत्तीसगढ़ 2018 विधानसभा चुनाव एक बदनुमा दाग साबित हुआ था। जिनकी छवि की छत्रछाया में ऐरे गैर छोट भैया किस्म के नेता भी आज बड़े नेता बन बैठे उनकी छवि छत्तीसगढ़ में नही चल पाई क्यों? यह आदिवासी बाहुल्य राज्य में एक यक्ष प्रश्न की तरह भाजपा के शीर्ष नेताओं को निरुत्तर कर देता है।
(जनमत संग्रह पर आधारित है यह लेख)
छत्तीसगढ़ में चाउर वाले बाबा का तमगा लेकर इतराने वाले पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह की 15 वर्षीय सरकार को जनता ने एक सिरे से क्यों नकार दी यह भी बड़ा प्रश्न है। आइये जानते हैं ऐसा क्या फेलियर रहा छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन का जो 2018 में नही खिला सका कमल ! जनमत संग्रह के आधार पर हम यह जानकारी साझा कर रहे हैं,लोगों से बातचीत करने पर आधारित है यह विश्लेषण
!!
तत्कालीन सरकार की मनमानी -
तत्कालीन सरकार के मुखिया रमन सिंह पहली सरकार में तो अच्छा कार्य किये,जनता की जमीनी जरूरतों को पूरा करने व राज्य के विकास में खूब ध्यान दिए ,जिससे सरकार को विकास वाली सरकार का तमगा मिला उसका खिताब जनता ने दूसरी पारी जीता कर दिया। दूसरी पारी में सिंह साब को हाथ से नही बल्कि चम्मच से खाने की कुछ लालसा हुई जिससे अच्छे लोग कुछ दूरी तय करने लगे जहां सरकार की मनमानी भी उजागर होनी शुरू हो गई,लेकिन तीसरी पारी में जब पुनः सत्तासीन हुए तब पूरी तरीके से हाथ से खाने में भरोसा खो बैठी रमन सरकार फुल स्पीड से चम्मच पर ही स्वाद लेना शुरू कर दिया,नतीजा यह रहा कि चौथी पारी खेलने के पहले ही आउट हो गए। जनता यह बखूबी समझ गई की अब डॉक्टर साब गरीबो का इलाज न करके बड़े लोगों के घरों के डॉक्टर बन गए हैं। जनता है सब जानती है,यह पहला कारण बना हार का।
घिसे
पीटे पुराने चेहरों पर ही दांव आजमाना -
जब चुनाव आता है तब चुनावी मुद्दा राजनीति का हिस्सा बन जाता है और बैनर पोस्टर की राजनीति शुरू हो जाती है। बड़े नेताओं की खिदमत में स्वागत में टिकट पाने का पोस्टर पॉलिटिक्स की धूम मचती है। यही धूम शीर्ष संगठन में बैठे लोगों की नजर धूमिल कर देती है,और यही हुआ भी। जो बेचारे जमीनी कार्यकर्ताओं ने मीटिंगों में भीड़ जुटाने,दरी, झंडा पोस्टर लगाकर पार्टी की मन से सेवा किया वे सब पूंजीवादी चेहरों के आगे धूलधूसरित कर दिए गए। जिनकी छवि जनता के बीच पकड़ व विश्वास की रही उन्हें दरकिनार कर पैराशूट से उतरे एवं सत्ता का स्वाद चखने वाले धुरन्धरों को टिकट देकर जनता की पसंद को दरकिनार कर दिया गया। जिसका नतीजा यह रहा कि जो कार्यकर्ता बड़ी उम्मीद से पार्टी की सेवा की वही संगठन से भीतर भीतर दूरी बनाते हुए बे मन से महज खाना पूर्ति करते हुए कंडीडेट के साथ भीड़ का हिस्सा बनकर रह गए। टिकट बंटवारे को लेकर उभरा मनमुटाव जनता को रास नही आया और वह जनता चाउर के स्वाद को भूल गई। इस प्रकार से संगठन की मनमानी व उदासीनता को दूसरा कारण समझा जाना चाहिए।
2023 में 2018 से उलट हो सकती है चुनावी रणनीति- 2023 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने कुछ अलग तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी की राज्य प्रभारी ने इसका संकेत कुछ दिन पहले ही दे दिया है। इस बार कोई भी गलती भाजपा शीर्ष नेतृत्व न दुहराते हुए जनता के बीच जाकर उनकी पसंद व जनाधार वाले नेता के नाम की लिस्ट बनानी शुरू कर दी है। शीर्ष नेतृत्व की ओर से कुछ सर्वेयर सर्वेक्षण के कार्य शुरू किया है।जनता के बीच गांव गांव ,शहर के गली मोहल्लों,पान ठेलों व सामाजिक कार्यकर्ताओं से उनकी पसंद व जनाधार वाले जमीनी लीडरों के नाम को जानना व सूचीबद्ध करना जारी रखा है।
इस बार का चुनाव यशस्वी प्रधानमंत्री के कार्य व उनकी लोकप्रियता पर ही लड़ने का विकल्प हो सकता है। इसके हिंट दिए जा चुके हैं। इस बार लगभग 60 से 70 प्रतिशत टिकट नए चेहरों को व पार्टी से जुड़े सामाजिक चिंतकों को दिए जाने की संभावना दिखती नजर आ रही है। यदि ऐसा ही पार्टी करेगी तो कुछ चमत्कार हो सकता है। एक ओर भाजपा में स्थानीय नेताओं की गुटबाजी साफ झलकती है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी की सरकार के मुख्यमंत्री की लोकलवाद व दमदार छवि भी जनता पर हावी नजर आती है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कोई कोर कसर नही छोड़ रहे हैं जनता से दूरी का। संवेदनशीलता का परिचय देते हुए जिस प्रकार से उन्होंने गाँव गाँव जाकर जनसंवाद असरकारी कार्यक्रम आयोजित किया और बोरबेल में फंसे 11 वर्षीय राहुल साहू के बचाव में जो रणनीति व संजीदगी अपनाया है उसकी चर्चा आमजनता पर गहरा छाप छोड़ गया है। इसको भाजपा कैसे दूर कर पायेगी उसका हल भी भाजपा नेताओं को ढूढना पड़ेगा।
नए व बेदाग चेहरों को टिकट देकर पाटी जा सकती है खाई- यदि भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष संगठन पार्टी के कर्मठ नए कार्यकर्ताओं को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारती है तो एक बार बात बन सकती है। लगभग यही सूत्र अपनाने की तैयारी भी पार्टी कर रही है। सूत्रों की माने तो पार्टी इस बार कई पुराने व वरिष्ठ चेहरों को बदलकर नए चेहरों पर दांव आजमाएगी । आर एस एस के स्वयंसेवक भी इस सूची में सूचीबद्ध हो सकते हैं। संगठन में बड़ा फेरबदल होने की संभावना भी बन रही है जो कि चुनाव जीतने का अहम फैसला हो सकता है।
राष्ट्रपति चुनाव भी कारगर साबित होगा-
एनडीए की तरफ से बनाई गई राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रोपदी मुर्मू भी एक सकारात्मक कदम राज्य के आदिवासियों को जोड़ने का होगा। प्रथम आदिवासी महिला को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बना कर भाजपा ने आदिवासियों का सम्मान बढाने का जो कार्य किया है,वह एक नई राजनीतिक लाभप्रद पारी है जिसका लाभ आदिवासी बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ का भाजपा को मिलना स्वाभाविक है। अब देखना यह होगा कि इसको पार्टी कितना भुना पाने में सफल होगी। हालांकि इस बार का चुनाव शीर्ष नेतृत्व के चेहरे पर लड़ा जाना स्वाभाविक है। केंद्र सरकार की योजनाओं व क्रियान्वयन पर,लोकप्रियता पर और मौजूदा सरकार की चिन्हांकित विफलताओं पर लड़ेगी भाजपा।