समन्वय- : धर्म सत्ता के साये में बढ़ती है राजसत्ता,गोमाता ही है सनातन का स्वाभिमान
Sat, Feb 7, 2026
संपादक की कलम से -
प्रमुख बिंदु
- समन्वयता से ही होगा विकास,हठ सिवाय हाथ मलने के कुछ भी नहीं..
गो प्रतिष्ठा ही सनातन स्वाभिमान का संकल्प" -
राज्यसत्ता और धर्मसत्ता का समन्वय कर सकता है अखंड सनातनी राष्ट्र का निर्माण -
लखनऊ- समन्वयता ही शक्ति का आधार -
भारत भूमि सदैव से ही सनातनी परंपरा की संवाहक रही है। इस भूमि में गुरुओं का बड़ा आदर सम्मान रहा तथा राजसत्ता का धर्म सत्ता मार्गदर्शन करती रही है।
गौ माता का आदर भारत भूमि का आभूषण रहा है और हर सनातनी की आस्था और सभ्यता का केंद्रबिंदु भी। प्रत्येक सनातनी अपने चूल्हे की पहली रोटी गौ माता के लिए निकालता है,यह परंपरा आज की नहीं बल्कि वर्षों पुरानी सभ्यता का प्रतीक है। सनातनी चौखट की रक्षाकवच रहीं हैं गौ माता और परिवार समाज व राष्ट्र की समृद्धिकारक धरोहर भी। सतयुग,त्रेता व द्वापर में भी गौ माता का बड़ा सम्मान रहा। ईश्वरी सत्ताओं के अवतरण का मूल भी इन्ही गौ माता को माना जाता है।
भगवान श्री कृष्ण बिन पनही के गौ चारण किया और गोपाल - ग्वाल व गोबिंद कहलाये। पूर्व में राजाओं के द्वारा गोदान व गो रक्षा का प्रकल्प बड़ी मात्रा में देखा गया।
स्वाभिमान की प्रतीक गो माता की रक्षार्थ युद्ध भी हुए और जीत भी ।
लेकिन दुर्भाग्य यह है कि कलयुग के इस दौर में " गोदान" की जगह "गो-बध"को प्रश्रय दिया जा रहा है। पूर्वकाल में राजाओं द्वारा गो रक्षा की जाती रही पूजन किया जाता रहा और दान दिया जाता रहा लेकिन आज लोकतंत्रात्मक शासन काल में गो बध को बढ़ावा दिया जा रहा है। और जब इसका विरोध धर्म गुरु करते हैं तो उन पर राजसत्ता चढ़ाई कर उन्हें मानसिक प्रताड़ना का शिकार बनाती है और लांक्षित करती है।
गो माता की हो रही हत्या का पाप जाने अनजाने में सभी सनातनियों पर लगा रहा है। क्योंकि राजा के कर्म की सजा कहीं न कहीं प्रजा को भी भुगतनी पड़ती है।
इसलिए,धर्म के धर्माचार्य अपनी सनातनी जनता को गो हत्या के पाप से मुक्त करने के लिए आगे आये हैं। क्योंकि पाप श्राप से बचाने का कार्य गुरु ने ही किया है यह शास्त्र व इतिहास दोनों बताते हैं।
राजसत्ता को धर्म का प्रतिपालक समझ लेना ही कहीं न कहीं बड़े नुकसान का कारण होता है। राजसत्ता कार्य व व्यवस्था का संचालन करती है परंतु धर्मसत्ता जो राजसत्ता के कार्य का निरूपण करती है उसकी समीक्षा कर उसे धर्मनीतिगत बनाती है ताकि किसी भी प्रजा को या राज्य की जनता व राजा से कोई भी पाप न हो ।
लेकिन,आज राजसत्ता की अकड़ व वहम् इतना अहम होते जा रहा है कि गुरु से ही विद्रोह करने में जुटा हुआ है। यह बिल्कुल अधर्म है और अनीति भी है ।
आवश्यकता है धर्मनीति की स्थापना की
जब जब धर्म पर राजनीति हावी होने की कोशिश की है तब तब समाज का राष्ट्र का पतन हुआ है। राजसत्ता पर हमेशा ही धर्मसत्ता का बुलडोजर चला है तभी राजसत्ता व धर्म सत्ता दोनों सुरक्षित रही हैं। यदि राजनीति का बुलडोजर धर्म नीति पर चलेगा तो राष्ट्र की अखंडता धूमिल होगी और खंडित होगी। इसलिए राजसत्ता पर धर्म सत्ता का नकेल होना अत्यंत आवश्यक है।
आज सनातन धर्म की सत्ता पर जो 4 धर्माधीश बैठे हैं सही मायने में वही धर्म व राष्ट्र के आचरण हैं। क्योंकि यही वह पुरातन सभ्यता के प्रतीक हैं जिसकी नींव सनातन के पुनर्स्थापना की रही है।
सनातन के पुनर्स्थापक हैं पूज्य शंकराचार्य-
हजारों वर्षों के त्याग,बलिदान,तप,जप और यज्ञ संकल्प के प्रतीक हैं हमारे सनातन के धर्माचार्य जिन्हें शंकराचार्य कहते हैं। सनातन धर्म के पुर्नस्थापक हैं आदि गुरु शंकराचार्य जी,जो लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व सैकड़ों धर्म विरोधियों से शास्त्रार्थ करके उन्हें हराकर सनातन को पुनरुत्थान व प्रतिष्ठापित किया। उसी परंपरा के संवाहक हैं हमारे बीच शंकराचार्य जी। हमारे पुरखों ने इनके द्वारा दिखाए रास्ते पर चले और वही सत्मार्ग हमारे पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आ रहा है। वही अनुशासन हमारी प्रेरणा है जिसे शंकराचार्य जी के द्वारा प्रतिपादित किया गया। हमारे पूर्वज उसी को मान कर अपने धर्म का पालन करते आये हैं।
आजकल के मोबाइली ज्ञान से है खतरा
पीढ़ीगत व परंम्परागत ढंग से धर्म
शास्त्र,नीति व आचरण का पालन करके हमारे पूर्वजों ने जो धाती बचाई उसे आज खंडित करने के लिए मोबाइली समाज मुंह बाए खड़ा है। इससे हमारे पूर्वजों का मान सम्मान,हमारी धर्मीक विरासत और हमारे संस्कारों को खतरा पैदा हो गया है,इससे बचना होगा। मोबाइल में एक ऐसा धड़ा धर्म की धज्जियां उड़ा रहा है जो पश्चिमी देशो के विधर्म पर पल रहा है। उसी पर परोसा गया अज्ञान व भ्रामक प्रपंच को अपना ज्ञान समझता है आज का युवा । पहले घरों में रामायण,गीता,नीति शास्त्र का वाचन होता था,गुरु परंपरा थी तो घर मे सामूहिक अनुष्ठान होते थे और घर के सभी बुजुर्ग,बच्चे,महिलाएं उस आध्यत्मिक सकारात्मक वातावरण में संस्कारित होती थीं,लेकिन आजकल परिवार एकाकी जीवन जीने की राह पर है जो कि विखंडित हो रहा है। मोबाइल में प्रसारित हो रहे अधकचरी बातों को फिल्टर करने का कोई छन्नी तो लगी नही है जो अच्छी और सत्य बातों को ही उसमें आगे करे। आवश्यकता है किताबों व बुजुर्गों के मार्गदर्शन की न कि मोबाइल के ज्ञान की।
धर्मसत्ता की छांव में राजसत्ता पलती है तो राज्य सुखी रहता है-
राजसत्ता के आगे गुरुओं व सन्यासियों का सत्य कभी नही झुका और जहां झुका भी वहां समाज व धर्म का पतन हुआ है ।
जब चाणक्य जो कि धर्म के शिक्षक व आचार्य थे,जब उनको राजसत्ता ने दबाना चाहा,उनका जब मजाक उड़ाया,अपमान किया तो राजसत्ता का ऐसा हश्र हुआ कि न तो व राजा बचा और न ही उसका राज।
आचार्य ने नए शासक व सत्ता का सृजन कर वैश्विक इतिहास रचा। इसलिए राजसत्ता को हमेशा परंम्परागत अधिकार प्राप्त अपने शंकराचार्य का सम्मान कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। क्योंकि धर्मसत्ता की छांव में ही राजसत्ता बढ़ती है पलती है और सुखी होती है। जब धर्मसत्ता का आशीर्वाद व संरक्षण राजसत्ता पर रहेगा तो अवश्य ही राजा प्रतापी बनेगा और उसकी कीर्ति धूमिल नही होगी।
गो माता का सम्मान राज्य के शिखर का सम्मान है,जो राजा के आचरण व संस्कार का बोध कराता है ।
गुरू हमेशा अपने राज्य की सत्ता का भला ही चाहता है,शब्द कठोर हो सकते हैं लेकिन गुरू का हृदय हमेशा ही कोमल होता है।
वस्तुतः यही स्थिति उत्तरप्रदेश के राजा ( लोकतांत्रिक समाज में मुख्यमंत्री) की होनी चाहिए उनको भी अपने जगद्गुरु शंकराचार्य का आशीर्वाद मिलना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ जी ( राजसत्ता) और शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ( धर्मसत्ता ) का समन्वय निश्चित रूप से भारत को नए अभ्युदय की ओर ले जाएगा और अखंड सनातनी राष्ट्र बनाने की ओर उन्मुख करेगा।
राज्य सत्ता को बस चाहिए कि धर्म सत्ता के मान बिंदुओं का मान रखे,गो माता को राज्य माता का सम्मान व प्रतिष्ठा प्रतिष्ठित करे ।
यही दीर्घकालिक अलंकरण की विधा है। इसका स्वागत राज्य ही नही बल्कि राष्ट्र का हर सनातनी करेगा ।
ज्योतिष्पीठाधीश्वर की हुंकार- : संसद भवन में पहला अधिकार गो माता का
Tue, Aug 5, 2025
मुम्बई
- महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुम्बई के पश्चिमी बोरीबली में दो दिवसीय गो संसद का आयोजन किया गया। जिसमें देशभर की सभी लोकसभाओं से गौ सांसदों ने हिस्सा लिया। रविवार को देश भर से इकट्ठे गो सांसदों को संबोधित करते हुए ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामि श्री: अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती ने कहा कि
संसद में सबसे पहले गो माता को भ्रमण करना चाहिए,संसद में पहला अधिकार गो माता का ही है।
यह कार्य देश के प्रधानमंत्री को करना चाहिए । यदि वह नही करते हैं तो हम सनातनी इकट्ठे होकर गो माता को संसद भवन में घुमाएंगे। बता दें कि इस समय ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य मुम्बई के बोरीबली स्थित कोराकेन्द्र में चातुर्मास्य कर रहे हैं। हजारों की संख्या में सनातनी प्रतिदिन पूजन,अनुष्ठान व वेदांत व्याख्यान का लाभ ले रहे हैं।
यह भी बता दें कि यह अब तक कि चौथी गो संसद है जिसका गठन पूज्य शंकराचार्य जी ने संपूर्ण भारत में गो रक्षा हेतु किया है। इससे पहले दिल्ली व प्रयागराज में गो संसद का आयोजन किया जा चुका है। संपूर्ण राष्ट्र में 4123 विधानसभाओं में गो विधायकों की नियुक्ति के साथ ही वेदलक्षणा रामा गौ धाम की स्थापना का प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हुआ।
इस संसद में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा,यदि गो हत्या बन्द नही हुई तो मैं स्वयं हाथ में तलवार लेकर गौ सेना का नेतृत्व करते हुए कत्लखानों में धावा बोलूंगा।
गौ संसद में निम्नांकित प्रस्ताव भी सर्व सम्मति से पारित हुए-
१) भारत के प्रधानमंत्री से ये कहा गया कि नई बनी संसद में गोमाता को प्रवेश किया जाए, गोसंसद ने ये प्रस्ताव पारित किया है।
२) महाराष्ट्र की निवर्तमान शिंदे सरकार को गोमाता को 'राज्यमाता' घोषित करने के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पारित हुआ
३) इस महनीय कार्य केलिए तत्कालीन महाराष्ट्र राज्य मुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित करने के शंकराचार्य जी के प्रस्ताव का स्वागत प्रस्ताव पारित किया गया।
४) महाराष्ट्र राज्य की वर्तमान सरकार से शीघ्रातिशीघ्र 'राज्यमाता' प्रोटोकोल और 'गौमाता राज्यमाता सम्मान संहिता' निर्मित करने का प्रस्ताव पारित किया गया ।
५) महाराष्ट्र राज्य सहित देश के सभी राज्यों की सभी विधानसभा क्षेत्रों (कुल ४१२३) में आदर्श रामाधाम की स्थापना के विचार का अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया गया। गोविधायकों और गोसांसदों ने अपने अपने क्षेत्रों में रामाधाम की स्थापना का संकल्प लिया।
६) प्रत्येक विधानसभा क्षेत्रों में कम से कम 80000 मतदाताओं को गोमतदाताओं के रूप में संकल्पित कराने का संकल्प लिया गया और इस हेतु अभियान चलाने का प्रस्ताव पारित किया गया।
७) गोहत्या में संलग्न बूचड़खानों को इस कार्य से विरत होने के लिए नोटिस देने का और आवश्यकता पड़ने पर इस हेतु संघर्ष करने के लिए एक 'गोरक्षा सेना' के गठन और प्रशिक्षण का प्रस्ताव भी पारित किया गया ।
८) राजस्थान सरकार द्वारा प्रति गोमाता के लिए आधा वीघा भूमि गोचर भूमि के रूप में आवंटित करने के निर्णय का स्वागत किया गया और धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया
९) भारत की लोकसभा के वर्तमान सत्र में गोमाता को राष्ट्रमाता बनाने के लिए अपनी आवाज उठाने के लिए होशंगाबाद मध्यप्रदेश सीट से सांसद श्रीमान दर्शन सिंह चौधरी जी के लिए धन्यवाद भेजने का प्रस्ताव पारित किया गया ।
ज्ञातव्य है कि संसद में अभी तक यह माँग सेठ गोविंद दासजी, श्री सुब्रमण्यम स्वामी जी और गेनीबेन ठाकोर ने उठाई थी अब उसे चौधरी जी ने आगे बढाया है।
९०) उत्तराखंड राज्य सरकार जैसे छोटे ट्रेक्टर केलिए सब्सिडी दे रही है वैसे ही बैल से खेती करने वाले किसान को प्रोत्साहन राशि देने के अनुरोध का प्रस्ताव पारित किया गया ।
११) रामा गाय की पहचान और गाय के नाम पर गवय की सेवा के भ्रम को दूर करने केलिए भारत के प्रत्येक राज्य में डी० एन० ए ० टेस्टिंग मशीन और पकड़े जाने पर वह मांस गोमांस है कि नहीं इसका शीघ्र निर्णय कराये जाने के लिए लैब बनाने का भी प्रस्ताव पारित किया गया।
१२) एक रामा गाय की सेवा करने वालों को पंजीकृत होने पर 'रामा सेवक प्रोत्साहन राशि ' देने , एक से अधिक दस तक रामागाय की सेवा करने वालों को पंजीकृत होने पर 'रामापालक प्रोत्साहन राशि' देने , दस से अधिक और १०० तक रामा गाय की सेवा करने वालों को पंजीकृत होने पर 'रामाधाम संचालक प्रोत्साहन राशि' देने का प्रस्ताव पारित किया गया।
इस हेतु २ हजार , २० हजार, २ लाख रुपए प्रति माह प्रोत्साहन राशि दिये जाने का प्रस्ताव पारित किया गया
१३) गौसेवा प्रतिष्ठा, रक्षा आदि के इन कार्यों को संपन्न करने हेतु जनता से आर्थिक सहयोग प्राप्त करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया । उल्लेखनीय है कि अभी तक लंबा आंदोलन चलाने पर भी शंकराचार्य जी ने कभी इस हेतु १ रुपये का भी चंदा नहीं लिया है । अब कार्य बढाने केलिए आर्थिक सहयोग गौभक्तों से लेने का प्रस्ताव पारित किया गया है
१४)तेलंगाना की वर्तमान सरकार द्वारा 100 एकड भूमि में आदर्श गोशाला स्थापित करने के लिए भी धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया
१५) पंजाब प्रदेश में छोटे बूचडखानों की स्थापना के विरोध का प्रस्ताव पारित किया गया क्योंकि इन्हीं की आड में गोहत्या की जारी रहने के प्रमाण मिले हैं।
१६) चतुर्थ गो संसद में पहलगांव की घटना में मारे गये निर्दोषों की सद्गति के लिए प्रार्थना की गई
१७) मालशीरथ विधानसभा के गोविधायक बलभीम संदीपनिर्देशे के असमय काल कवलित होने पर शोक संवेदना व्यक्त की गई।
गोपाष्टमी को पुन: मिलने की सदिच्छा के साथ चतुर्थ गो संसद संपन्न घोषित हुई
यह गो संसद परमाराध्य परमधर्माधीश के सान्निध्य में प्रवर गोसेवाधीश पं. देवेन्द्र पांडेय दक्षिणांचल गोसेवाधीश पं. किशोर दवे जी के संचालन और द्विशताधिक गो सांसदों विधायकों सहित अनेक विषय विशेषज्ञों से संबोधित और सम्मानित रही।