: ED से राहत मिलते ही बीमार माँ से मिलने अस्पताल पहुंचे राहुल गांधी
Fri, Jun 17, 2022
नई दिल्ली
- ED से तीन दिनों की मिली मोहलत से राहुल गांधी अपनी माँ से मिलने अस्पताल पहुंचे हैं। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्षा सोनिया गांधी इन दिनों कोरोना से संक्रमित हैं और सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती हैं। माँ की बीमारी का हवाला देते हुए राहुल ने ED से पूंछतांछ की तीन दिनों की मोहलत मांगी थी .ED से राहत मिलने के बाद राहुल गांधी बेटे का फर्ज निभाते हुए माँ की देखरेख में रात में ही अस्पताल पहुंचे हैं। सोनिया गांधी दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में बीते रविवार से ही भर्ती हैं।
कोरोना संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती हैं सोनिया गांधी-
सोनिया गांधी 2 जून को कोरोना से संक्रमित हो गई थीं। वहीं 11 जून को हुई उनकी दूसरी जांच भी पॉजिटिव आई थी,जिसके बाद रविवार 12 जून को तबियत बिगड़ने के बाद सोनिया गांधी को सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था .तब से वह डॉक्टरों की निगरानी में भर्ती हैं।समाचार एजेंसी एएनआई ने अपने सूत्रों के हवाले से कहा है कि सर गंगाराम अस्पताल में ईएनटी विभाग के डॉक्टरों की एक टीम इनके स्वास्थ्य की जांच कर रही है।
: राहत- ईडी ने 30 घण्टे पूंछतांछ के बीच राहुल गांधी को 100 घण्टे की दी मोहलत
Fri, Jun 17, 2022
नईदिल्ली
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कांग्रेस के लिए कुछ राहत की सांस लेने वाली खबर सामने आई है
। नेशनल हेराल्ड मामले में पूंछतांछ कर रही ईडी ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद राहुल गांधी के निवेदन को स्वीकृति देते हुए 100 घण्टे की मोहलत दी है। इस संबन्ध में राहुल गांधी से लगातार 3 दिनों से हो रही पूंछतांछ को अब राहत दी गई ही। बता दें कि
प्रवर्तन निदेशालय ने राहुल से गुरुवार को पूंछतांछ न कर शुक्रवार को बुलाया था,जिसमे राहुल गांधी ने मोहलत मांगते हुए सोमवार को उपस्थित होने की गुजारिश ईडी से की थी,जिस पर मंजूरी देते हुए उनसे सोमवार को पूँछतांछ की जाएगी।
पूंछतांछ
की जितनी लंबी लिस्ट उतना लंबा कांग्रेस का धरना प्रदर्शन -
इधर जितनी लंबी ईडी के सवालों की लिस्ट है उधर उतना ही लंबा कांग्रेस का धरना प्रदर्शन होते जा रहा है। दिल्ली की सड़कों से लेकर अन्य प्रांतों तक अपने नेता के समर्थन में कांग्रेसी सड़कों पर प्रदर्शन करने आगे आ रहे हैं। आये दिन लगातार पुलिस से झड़प व उग्र प्रदर्शन की बात सुर्खियों में बनी रहती है।
इस मामले में भाजपा ने मौन साध रखा है ? राजनीति
में जो दिखता है दरअसल, वो होता नहीं ! राहुल की ईडी पूंछतांछ मामले में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा ने मौन साधते हुए हो रहे करतूतों पर मौन साध रखा है। कानून का राग अलापने वाली पार्टी ने अपने एजेंडों पर फोकस करते हुए राजनीतिक समीकरणों पर लगता है ध्यान दे रही है। राहुल की पूंछतांछ के बाद सोनिया गांधी से भी पूंछतांछ होनी है। हो सकता है कि सड़कों पर हो रहे आंदोलनों की निगरानी करते हुए प्रवर्तन निदेशालय की पूंछतांछ पूरी होने के बाद कुछ स्टेंट लेने की मंशा का तूफान थमा हो ऐसी चर्चा भी विश्लेषकों के अंदर खाने में चल रही है।
राहुल को 100 घण्टे की मिली राहत के बाद भी क्या जारी रहेगा धरना प्रदर्शन-
प्रवर्तन निदेशालय से मिली 100 घण्टे की मोहलत के बाद भी क्या कांग्रेसी अपने नेता के समर्थन व ईडी के सवालों की पूंछतांछ के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन करेंगे या उनके कदम थमेंगे यह भी गौर करने वाली बात होगी। क्या बनेगी आगे की रणनीति यह भी रणनीतिक हिस्सा होगा। हालांकि इस मामले ने पूरे देश मे राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। महत्वपूर्ण यह है कि देश की सर्वोच्च स्वायत्त इकाइयां हैं ईडी व सीबीआई इन पर भरोसा करना राष्ट्रीय सुरक्षा व गंभीरता को बनाये रखना है।
: नेशनल हेराल्ड ;ईडी बनाम कांग्रेसी सत्याग्रह
Wed, Jun 15, 2022
राज्य ब्यूरो (छत्तीसगढ़)- सन 1938 नेशनल हेराल्ड की शुरुवात माना जाता है। जवाहर लाल नेहरू ने इसकी शुरुवात की । दरअसल , नेशनल हेराल्ड एक अखबार के रूप में शुरू हुआ जिसमें नेहरू के अलावा करीब 5 हजार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी इसमे शेयर होल्डर बनाये गए थे ऐसी चर्चा तथाकथित तौर पर की जाती रही है। यही अब कांग्रेस के गले की फांस बन गया है। एक तरफ 2014 से लेकर अब तक भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने राजनैतिक डिबेट,मंच से लेकर कोर्ट तक कांग्रेस के वारिश राहुल गांधी को निशाने पर लिए फिरते हैं। हालांकि राहुल गांधी के पीछे भाजपा हाथ धोकर पड़ी है।
कांग्रेस शासित प्रदेशों के नेता व मुख्यमंत्री दिल्ली में जाकर सत्याग्रह की राह पकड़े थे,लेकिन पुलिस ने जबरिया घसीटते हुए पुलिस कस्टडी में ले लिया। ये सभी कांग्रेसी अपने नेता राहुल गांधी से हो रही ईडी पूंछतांछ का विरोध प्रदर्शन करने राजधानी दिल्ली की सड़कों पर बैठे थे।
अब हम बात करते हैं राजनीतिक मतभेदों की तो बता दें कि, भाषण चाहे खुले मैदान में हो या संसद में,भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और प्रधानमन्त्री मोदी के निशाने पर कांग्रेस हमेशा रहती है। परदादा जवाहरलाल नेहरू से शुरुवात होती है और नाती राहुल गांधी तक को लपेटा जाता है। जाहिर सी बात है कि,भाजपा अपने नारे "कांग्रेस मुक्त भारत" को पूरा करने के लिए कोई कोर कसर नही छोड़ रही है। इसका जिक्र अक्सर भाजपा के मंचीय भाषणों पर होता रहता है। यही कारण है कि अब कभी राजनीतिक तौर तरीकों से तो कभी जांच एजेंसियों के माध्यम से कांग्रेस के बड़े नेताओं की पुरानी किताबें खोल ही दी जाती हैं।
नई बोतल में पुरानी शराब का सहारा-
इस बार भी कहानी कुछ ऐसी ही है। नेशनल हेराल्ड मामले को फिर से जिंदा कर दिया गया और काग्रेेेस के राहुुल
गांधी को समन भेज ईडी बुला लिया गया। हालाकिं यह मामला राहुल के समय का नही है लेकिन दादा के समय की शुरुवात पोते पे सवार वाला मामला है। यह उसी तरह है जैसे किसी नई बोतल में पुरानी शराब भर दी जाय। दरअसल जब से मोदी सरकार केंद्र में आई है तब से अन्य पार्टी के नेताओं कि नींद तो उड़ी हुई है क्योंकि ईडी और सीबीआई का पावर सबको पता है और उस करंट का बटन भी किसके हाथ है यह भी पता है। इसलिए दो राज्यों के मुख्यमंत्री भी राहुल जी के चहेतों में से हैं। खासकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तो कद्दावर व साहसिक कांग्रेसी माने जाते हैं जो राहुल के करीबी भी हैं। राहुल के कृपा पात्र बघेल ने दिल्ली जाकर और पुलिस के हाथों गिरफ्तारी देकर यह सिद्ध भी कर दिया कि उनके नेता के प्रति मन मे कितना आदर भाव है। राहुल के लिए भूपेश कुछ भी कर सकते हैं ऐसा उन्होंने कहीं कहीं अपने उद्गार व्यक्त करते रहते हैं। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक पुरोधा स्व मोतिलाल वोरा का भी नाम शामिल होने से मनी लांड्रिंग का केस अटका पड़ा है। राष्ट्रीय कांग्रेस के तत्कालीन विश्वस्त सलाहकार व धनकुबेर रहे मोतीलाल वोरा जी का इस्तेमाल हमेशा से ही कांग्रेस करती रही है। कांग्रेस के संकटमोचक रहे छत्तीसगढ़ के "बाबू "जी के नाम का हमे लगता है कहीं अब भी सहारा न ले कांग्रेस।
समर शेष है पर विशेष है..
राजनीति
में
जितने भी रंग दिखते हैं वे सभी चुनावी रंग में रंगे होते हैं। परिणामस्वरूप आज की फसल कल काटी जाएगी। यदि अपराध सिद्ध होता है तब भाजपा चारों तरफ चिल्ला चिल्ला के चोरी का सरदार सिद्ध करने में बाज नही आएगी जिसका कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता है। चूंकि 2023 में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं और 2024 में लोकसभा भी। अन्य कोई दल भाजपा के सामने राष्ट्रीय स्तर पर हैं नही,सिर्फ कांग्रेस ही एक पार्टी रह गई है जो गला फाफ फाड़कर मोदी का विरोध करती है,हालांकि विपक्ष का काम ही है सत्ता पक्ष का विरोध करना। यदि विपक्ष नही होगा तो लोकतंत्र कैसे बचेगा । इसलिए राजनीतिक गोटियां सरकती रहनी चाहिए। इस तरह का माइंड प्रेशर का काम राजनीतिक तंबू को उखाड़ने में किया जाना स्वाभाविक है। हालांकि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस अभी कमजोर नही हुई है ,बल्कि पहली बार मुख्यमंत्री बने भूपेश बघेल का कद व भरोसा छत्तीसगढ़ की जनता अब अधिक करने लग गई है। अन्यत्र इसका असर पड़ सकना लाजमी है। राहुल के बाद सोनिया से भी पूंछतांछ ईडी करेगी तो क्या कांग्रेसी बड़े पैमाने में धरना प्रदर्शन करेंगे या फिर कानून व्यवस्था का नैतिकता से पालन होगा यह देखने वाली बात होगी। कुछ भी हो राजनीतिक बिसात का मंच गरम है जो चरम पर हो सकता है। अभी तो शुरुवात है कुछ महीने चुनाव के बचे हैं ,घोषणा होनी शेष है । और कांग्रेस मुख्य नेत्री सोनिया गांधी का बयान भी शेष है। समर शेष है पर विशेष है । इसमे दो सवाल और उठते हैं कि यदि ईडी की कार्यवाही गलत है तो फिर राहुल गांधी को ईडी आफिस न जाकर खुद सड़क पर बैठ जाना चाहिए ,दूसरी बात यह कि फिर जो जांच चल रही है पूंछतांछ हो रही है उसका पूरे मन से सहयोग करना चाहिए। राहुल को चाहिये कि ,गलत नही हैं तो पूरे मनोयोग से कानून का पालन होने दें ताकि उनकी निष्पक्षता जनता से सामने सकारात्मक रह सके।