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: भारत की लंबी यात्रा के बाद शंकराचार्य का प्रयागराज में होगा कल भव्य स्वागत

प्रयागराज- सनातन धर्म सत्ता के सर्वोच्च धर्म गुरु ज्योतिर्मठ के पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महराज गो प्रतिष्ठा को लेकर राष्ट्र माता घोषित कराने व देश भर में गो हत्या प्रतिबंधित कानून लागू करने के उद्देश्य से पूरे भारत की यात्रा करके कल अपराह्न प्रयागराज पहुंच रहे हैं।  भारत देव ऋषि गो गंगा और धर्म गुरुओं की भूमि है। अखंड भारत की पहचान गुरुकुल और गोकुल से रही है। गाय को माता के रूप में यहां पूजा जाता है,देवताओं अवतरण भी गाय के रक्षार्थ ही हुआ चाहे वह भगवान श्री राम हों या श्री कृष्ण । सनातन में गाय को धर्म का मूल माना जाता है। आजकल सनातन कि गूंज तो दिखाई पड़ती है लेकिन गाय की हत्या और प्रताड़ना ज्यादा है। गाय की हत्या बन्द हो और राष्ट्र माता का सम्मान मिले इस हेतु ज्योतिषपीठ के वर्तमान शंकराचार्य ने एक बहुत बड़ा संकल्प लेकर गो माता राष्ट्र माता प्रतिष्ठा आन्दोलन का शंखनाद करके पदयात्रा की और भारत की यात्रा पूर्ण की । इस यात्रा से पूरे देश में गो माता को लेकर एक बड़ा सकारात्मक माहौल बना हुआ है। यह पूज्य शंकराचार्य के महाअभियान का ही परिणाम है कि कुछेक राज्यों ने गौ को राज्य माता घोषित कर दिया है। अब भारत की यात्रा पूर्ण करके प्रयागराज पहुंच रहे हैं। शंकराचार्य जी का रविवार को अपराह्न 3 बजे प्रयागराज आगमन हो रहा है।  [caption id="attachment_4809" align="aligncenter" width="256"] ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महराज[/caption] 3 बजे पहुंचेंगे प्रयागराज- जगद्गुरु शंकराचार्य का कल अपराह्न 3 बजे बमरौली हवाई अड्डा में आगमन होगा,वहां से गोपीगंज के लिए प्रस्थान करेंगे। गोपीगंज एक धार्मिक कार्यक्रम में महराज जी का आशीर्वचन होगा तत्पश्चात काशी के लिए प्रस्थान करेंगे। एअरपोर्ट में होगा भव्य स्वागत -  पूज्य शंकराचार्य का स्वागत बमरौली हवाई अड्डा में भव्य रूप से किया जाएगा। लंबे काफिले के साथ शहर में कई जगहों में उनका स्वागत वंदन किया जाएगा और फिर गोपीगंज भदोही के लिए प्रस्थान करेंगे। शंकराचार्य का स्वागत प्रयागराज के प्रतिष्ठित गणमान्य लोगों द्वारा किया जाएगा। फिर वहाँ से भक्तों का काफिला काशी के लिए प्रस्थान करेगा।  शंकराचार्य के आगमन को लेकर प्रयागराज वासियों में काफी प्रसन्नता व दर्शन हेतु उत्साह है। भारत यात्रा के बाद ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य का पहली बार प्रयागराज आगमन हो रहा है।

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