: रायपुर की गुलाबी पंखुड़ियां कांग्रेस के लिए होंगी कितनी कोमल या कठोर,सियासत के गलियारों में चुभता गुलाबी कांटा देगा दर्द या 23-24 में देगा सुकून!
रायपुर- राजनीतिक गलियारों में आशा भरी निगाहों से देखता कांग्रेस का अधिवेशन किसी तिलस्म से कम नही.यह तिलस्म उस जादुई पतली रस्सी की तरह है जिस पर जादूगर बहुत ही संभल कर चलता है.लेकिन यहाँ न तो कोई उम्दा जादूगर है और न ही करिश्माई पंडित जो मंत्रों की साधना से मृतसंजीवनी की विद्या जागृत कर जीवन मे जोश भर देगा.रायपुर के जोरा में जोर आजमाइश करते देश भर के कांग्रेसी नेताओं का जमावड़ा दो दिन से देखने को मिल रहा है.कांग्रेस पार्टी की जादूगरनी प्रियंका गान्धी वाड्रा को गुलाब की पंखुड़ियों पर चला कर जो राहे खिदमत की गई वो कईयों के गले नही उतर रहा है.और राजनीतिक सफर में गुलाब के पंखुड़ियों को कांटों से अलग कर सजाया तो गया लेकिन जिन गुलाबी टहनियों से उनके काँटे अलग किये गए कहीं वही ढेर न बन जाएं क्योंकि फूलों को रौंदना कहीं न कहीं भारी पड़ जाता है.
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प्रियंका गान्धी के लिए बिछाए गए गुलाब की पंखुड़ियां(फ़ोटो सोशल मीडिया)[/caption]
भारत जोड़ो यात्रा का महारथी 2024 के समर में रायपुर के जोरा से क्या जोर लगा पाने में सफल होंगे-
छत्तीसगढ़ में भारत जोड़ो यात्रा के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 85 वां अधिवेशन आयोजित किया गया है.इस अधिवेशन में पूरे कांग्रेसी दिग्गजों ने शिरकत की है.लगभग 15 हजार कांग्रेसी सैनिक रायपुर को छावनी बनाकर 2024 की बागडोर को फतह करने की रणनीति बनाने एकजुट हुए हैं.राजस्थान के बाद छत्तीसगढ़ को मेजबानी सौपना भी यहां के मुखिया भूपेश बघेल के कद को बढ़ाना है.एक तरफ जब भारत जोड़ो की लंबी यात्रा पर राहुल गांधी निकले तो शुरुआती दौर में असरहीन टिप्पणी देखी गई.लेकिन जैसे जैसे कदम बढ़ते गए कारवां बढ़ता गया वैसे वैसे विपक्ष मे हलचल तेज होती गई.सर्द रातों में और कड़कड़ाती ठंड में राहुल की गर्मी की भी अंतराष्ट्रीय खबर बनी,लोग उनके अंदर की गर्मी को जानने सूक्ष्मतम अनुसंधान करने में लग गए.राजनेताओं से लेकर योगगुरु भी तंज कसते देखे गए.लेकिन राहुल ने न तो हार मानी और न ही रार ठानी बल्कि धुन के पक्के राहुल ने कुछ अलग करते रहे.ईडी की जांच परीक्षा में भी खरे उतरे राहुल और उनकी माँ कांग्रेस की वरिष्ठ नियंत्रक सोनिया गांधी की राजनीतिक कुशलता और त्याग की कहानी ने पार्टी पर पैतृक व परिवारवाद के लगे तमगे को भी दूर करते हुए गैर गान्धीयन मल्लिकार्जुन खड़गे को पार्टी की बागडोर सौंप दी.अब पार्टी शायद कुछ करवट ले ले इस उम्मीद व भरोसे से सोनिया गांधी आज अधिवेशन में भावुक होते हुए अपने राजनीतिक सन्यास की ओर इशारा कर गईं.यह तो तब होता है जब अपने गुलिस्तां को सुरक्षित देखकर किसी कुशल माली के हाथों जिम्मेदारी सौंपी जाती है.रायपुर अधिवेशन में जो कांग्रेसी तारे दिख रहे हैं उनमें काली रात की उपस्थिति की चमक है या फिर आसमान की स्वच्छता का प्रतीक.यह तो आगामी विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनावों के समर में देखने को मिलेगा.बहरहाल,अभी तो मोदी के रंग में रंगी सियासत अनेकों जोड़तोड़ की गणित से गुजरेगी तब यदि कांग्रेसी बीजगणित मजबूत रहा तो कुछ अंश सुधरता दिख सकता है,बरना अभी तो हिंदुत्व,राष्ट्रवाद,मन्दिर कॉरिडोर निर्माण और विकास का मुद्दा ही भारी दिख रहा है जिस पर भाजपा दौड़ती चली जा रही है.हालांकि राहुल की बढाई गई दाढ़ी में भी राजनीतिक परिपक्वता अब दिखने लगी है.पहले से अब कांग्रेस मजबूत जरूर हुई है लेकिन सेंध लगाने में माहिर विपक्षी पार्टी से भी गुरेज कर पाना थोड़ा मुश्किल भी लगता है.अधिवेशन के पूर्व कांग्रेसी नेताओं के घर ईडी के छापे कहीं न कहीं सियासत पर पहरा डालने की कोशिश थी यह हम नही बल्कि सियासतदार बोल रहे हैं.क्योंकि,सियासत हर समय अपने रंग-ढंग बदलते रहती है.
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