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: ईडी की जांच में फंसी छत्तीसगढ़ की शराब-2000 करोड़ का घोटाला आया सामने,नेता के साथ ही आईएएस अधिकारी भी घोटाले में शामिल.

  रायपुर (छत्तीसगढ़)- 2019-20 में जब देश कोरोना से जूझ रहा था तब छत्तीसगढ़ में शराब के अवैध कारोबार में सत्तादल के नेता और जिम्मेदार अधिकारी संलिप्त थे.यह बात  प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सामने आई है.राज्य में ED की लगातार छापेमारी से जहां कोल घोटाले के राज सामने आया तो वहीं सबसे बड़ी चोरी दारू विक्री को लेकर भी उजागर हुई.2000 करोड़ रुपये की अवैध शराब विक्री का भी पर्दाफाश किया गया.जिसमे कांग्रेस की सरकार के राजनीतिक रसूखदार से लेकर आइएएस तक का नाम उजागर हुआ है.यह खुलासा ED ने किया है.घोटाले के मास्टरमाइंड को बेनकाब करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने जांच का रुख साफ कर दिया है.इस घोटाले से कांग्रेस सरकार की नीयत और नीति पर प्रश्नचिन्ह साफ दिखाई देने लगा है.विपक्ष और राज्य की जनता आक्रोशित दिखती नजर आ रही है.इसी साल विधानसभा चुनाव भी होना है जो कहीं न कहीं सत्तारूढ़ दल के लिए मुसीबत खड़ी हो सकने वाली बात भी हो सकती है.हालांकि राज्य के मुखिया इस पर खंडन व कटाक्ष करने की लगातार कोशिश करते आ रहे हैं.जांच और शक की सुई क्रमशः जारी है कुछ और नाम उजागर हो सकते हैं. ई डी ने 2000 करोड़ रुपये के शराब घोटाले का दावा किया है.इसके लिए कांग्रेस के नेता और रायपुर मेयर एजाज ढेबर को सरगना बताया है.जिसमे यह खुलासा हुआ कि शराब विक्री में 40 फीसदी अवैध शराब की विक्री हुई जिसका पैसा नेता और अधिकारी मिलकर हजम कर गए.इसमे IAS अधिकारी अनिल टुटेजा का भी नाम सामने आया है.शराब कारोबारी व मेयर के भाई अनबर ढेबर का नाम प्रमुखता से लिया गया जिसके लिए पीएमएलए का केस दर्ज हुआ है.ईडी अपनी गिरफ्त में लेकर पूंछतांछ कर रही है.बताया जा रहा है कि इस पैसे का उपयोग चुनाव में किया गया है.यह घोटाला सन 2019 से 2022 में हुआ,यानी जब देश व प्रदेश में कोरोना के संक्रमण से लोगों की जान खतरे में थी और आपात की स्थिति जनमानस पर बनी हुई थी तब इधर शराब का अवैध कारोबार किया जा रहा था. 2003 बैच के आई ए एस अधिकारी जो वर्तमान में राज्य के उद्योग व वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव पद पर पदस्थ हैं,उनकी भी संलिप्तता सामने आई है.इससे अधिकारी वर्ग में भी खलबली मची हुई है.हालांकि अभी प्रदेश के कुछ आला अफसर अन्य घोटाले में भी जेल में हैं.कोयला घोटाले की आंच के बाद अब शराब घोटाला वर्तमान सत्ता पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.इस मामले को लेकर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने तमाशा खड़ा कर दिया है.राज्य के जिलों में लगातार भाजपाई कांग्रेस सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.भाजपा के साथ साथ आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद ने भी मुख्यमंत्री के इस्तीफ़ा देने की मांग की तो वहीं छत्तीसगढ़ की जनता ने भी सरकार की दोहरी भूमिका पर सवाल खड़ा कर दिया है. ED का यह है आरोप- ईडी ने आरोप लगाते हुए कहा कि " जांच में पाया गया है कि अनबर ढेबर की अगुवाई में एक संगठित अपराधिक गैंग छःत्तीसगढ़ में सक्रिय होकर काम कर रहा था.अनबर ढेबर एक आम व्यक्ति है जो शराब का कारोबार कर राजनीतिक हस्तियों और वरिष्ठ अधिकारीयों की ओर से पैसा लेता था.अनबर ढेबर ने एक बड़ी साजिश रची और घोटाले को अंजाम देने के लिए व्यक्तियों/ इकाइयों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया ताकि छःत्तीसगढ़ में बेची जाने वाली शराब की हर बोतल से अवैध पैसे कमाए". मुख्य रूप से अनबर ढेबर कलेक्शन एजेंट के रूप में काम किया और घोटाले को अंजाम दिया. अनबर ढेबर इस घोटाले का अंतिम लाभार्थी नहीं' ईडी ने आरोप लगाया कि अनवर ढेबर इस पूरे अवैध धन संग्रह के लिए जिम्मेदार थे, लेकिन वह इस घोटाले के अंतिम लाभार्थी नहीं हैं.यह बात सामने आयी कि एकत्रित राशि का कुछ हिस्सा अपने पास रखकर शेष राशि अपने राजनीतिक आकाओं को दे दिया करता था.एजेंसी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में राज्य शराब व्यापार के 'सभी पहलुओं' पर सरकार का नियंत्रण है यानी शराब खरीद से लेकर खुदरा बिक्री तक सरकार के हाथ में है और किसी भी निजी दुकान की अनुमति नहीं है. वहीं अनवर ढेबर की हिरासत के लिए शनिवार को रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में दायर किए गए अपनी अर्जी में ईडी ने दावा किया कि एक सिंडिकेट द्वारा छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला किया गया, जिसमें राज्य के उच्च स्तरीय सरकारी अधिकारी, निजी व्यक्ति और राजनीतिक हस्तियां भी शामिल हैं.ईडी ने आरोप लगाया है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी अनिल टुटेजा शराब कारोबारी अनवर ढेबर के साथ छत्तीसगढ़ में अवैध शराब सिंडिकेट के “सरगना” हैं और भ्रष्टाचार से अर्जित रकम का इस्तेमाल चुनाव प्रचार में भी किया गया. सियासत में गहमा गहमी उठने लगी हैं आरोप प्रत्यारोप की लपटें-  यूं तो आरोप प्रत्यारोप का दौर राजनीति में आम बात है लेकिन वर्तमान में शराब घोटाले को लेकर प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया है.मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के इस्तीफे की मांग कर रहे आम आदमी पार्टी ने कहा कि कोई भी घोटाला मुख्यमंत्री की सहमति के बगैर नही हो सकता,इसलिए मंत्री के साथ ही मुख्यमंत्री को भी इस्तीफा देना चाहिए.हालांकि आम आदमी पार्टी के दिल्ली सरकार के उपमुख्यमंत्री भी शराब घोटाले में जेल में बंद हैं.ऐसे में यह सवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी कटघरे में खड़ा करता है क्योंकि उन्ही के मंत्री मनीष सिसोदिया भी इसी तरह के फर्जीवाड़े में अंदर हैं और ईडी/सीबीआई ने ही घोटाले का पर्दाफाश किया है.वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी प्रतिक्रिया व प्रदर्शन राज्य में तेज कर दी है.इसको लेकर बुधवार को राजधानी में उग्र धरना प्रदर्शन करने का निश्चय किया है. बता दें कि,आगामी कुछ माह बाद छःत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव भी है.उल्लेखनीय बात यह भी है कि राज्य में भाजपा सरकार को पटखनी देने में शराब बंदी को लेकर गंगाजल की कसम भी कांग्रेस पार्टी के लिए सत्ता हथियाने का प्रमुख कारण था.लेकिन शराब बंदी तो दूर रही उलट इसके बिक्री तेज की गई और अब अवैध कारोबार का पर्दाफाश किया गया.इससे कांग्रेस पार्टी को नुकसान भी झेलना पड़ सकता है. मुख्यमंत्री ने भी जांच पर उठाया है सवाल,कहा बदले की भावना से राजनीतिक कदम है ईडी का आरोप- मुख्यमंत्री ने भी इसे बदले की भावना के तहत उठाया गया कदम बताकर ईडी की नीयत व कारवाई पर सवालिया निशान खड़ा किया है.मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोपित किया है कि ईडी और सीबीआई भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय सरकार के इशारे पर कार्य कर रही है जो कि राजनीतिक प्रतिद्वंदीता से प्रेरित है.उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि यदि छःत्तीसगढ़ में घोटाले हुए हैं तो जितने भी बार ईडी और सीबीआई ने दबिश दी है,उन सभी मे जब्त किए गए अवैध संपतियों/पैसों का खुलासा क्यों नही करती.इससे राज्य की सियासत में सरगर्मी देखने को मिल रही है.हालांकि आम जनता ने भी अब सरकार पर संदेह करना शुरू कर दिया है,लोग कहने लगे हैं कि बिना आग के धुंआ नही उठता है.जनता का कहना यह भी है कि जिस पैसे से धनकुबेरों ने अपनी तिजोरियां भरी हैं उस पैसों से आम जनता की मूलभूत सुविधाओं में तेजी आ सकती थी,सरकारी स्कूलों,अस्पतालों की स्थिति सुधर सकती थी और किसानों को अटके हुए धान का पैसा मिल सकता था.यहां पर जनता के दागे गए सवाल भी लाजमी हैं.हालांकि अभी ईडी की चल रही जांच में और भी रसूखदारों के नाम उजागर होने की सँभावनां देखी जा रही है.आगे क्या होगा यह कहना तो जांच पूरी होने और नतीजे आने पर ही स्प्ष्ट हो सकेगा.

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